पापा चिडया कहाँ रहती है
किसने उसको घर दिया है
कौन देता खाना उसको
कहाँ से उसने पानी पीया है
आओ बेटा हम तुम्हें बताये
बाग़ बगीचे खेल खालियारे
दुनिया के यह सब्जे सारे
चाँद सितारे सारे के सारे
उस रब्बुल इज्ज़त ने उतारे
पापा हम को ये भी बताएं
सायें सायें चलती हवाएं
भूखे बच्चे रोटी मायें
ऐसा माहौल क्यों बना है
क्या यह भी अल्लाह ने दिया
न बेटा ये सब जो हुआ है
इन्सान ने लालच में किया है
स्वर्ग का लालच इतना बढ़ा है
इंसा को खुद को भूल गया है
लालच में वह गिर रहा है
पापा इंसान इतना बड़ा है
आपस में वह लड़ रहा है
मन मर्ज़ी वह कर रहा है
इस में इंसा मर रहा है
अल्लाह मिया क्या कर रहा है
बेटा दुनिया खाब सी जानो
फकट उस रब को पहचानो
वादा अपना तुम निभाओ
रोजाना मस्जिद को जाओ
पापा मुझ को इतना बताओ
सारे सवाल फिर से समझाओ
जन्नत को अल्लाह ने बनाया
उस में फल का पेड क्यों लगाया
बिन मर्ज़ी के अल्लाह की
आदम फल क्यों है खाया
बेटा यह सब बहाना था
इंसान को दुनिया में आना था
जन्नत तो आदम के लिये
चन्द दोनों का ठिकाना था
इंसान को हर हाल मैं बेटा
दुनिया में ही लाना था
पापा मैं सब समझ गया
उसका निराला खेल
आदम हव्वा ,जन्नत पेड
सब की उसके हाथ में नकेल
वह है सब का मालिक
सब हैं उसके बन्दे
चाहए जैसे हों इंसान
सब हों अच्छे इंसान
या फिर सारे गंदे
शाहिद कबीरna
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