Thursday, May 24, 2018

पापा चिडया कहाँ रहती है
किसने उसको घर दिया है
कौन देता खाना उसको
कहाँ से उसने पानी पीया है

आओ बेटा हम तुम्हें बताये
बाग़ बगीचे खेल खालियारे
दुनिया के यह सब्जे सारे
चाँद सितारे सारे के सारे
उस रब्बुल इज्ज़त ने उतारे

पापा हम को ये भी बताएं
सायें सायें चलती हवाएं
भूखे बच्चे रोटी मायें
ऐसा माहौल क्यों बना है
क्या यह भी अल्लाह ने दिया

न बेटा ये सब जो हुआ है
इन्सान ने लालच में किया है
स्वर्ग का लालच इतना बढ़ा है
इंसा को खुद को भूल गया है
लालच में वह गिर रहा है

पापा इंसान इतना बड़ा है
आपस में वह लड़ रहा है
मन मर्ज़ी वह कर रहा है
इस में इंसा मर रहा है
अल्लाह मिया क्या कर रहा है

बेटा दुनिया खाब सी जानो
फकट उस रब को पहचानो
वादा अपना तुम निभाओ
रोजाना मस्जिद को जाओ

पापा मुझ को इतना बताओ
सारे सवाल फिर से समझाओ
जन्नत को अल्लाह ने बनाया
उस में फल का पेड क्यों लगाया
बिन मर्ज़ी के अल्लाह की
आदम फल क्यों है खाया

बेटा यह सब बहाना था
इंसान को दुनिया में आना था
जन्नत तो आदम के लिये
चन्द दोनों का ठिकाना था
इंसान को हर हाल मैं बेटा
दुनिया में ही लाना था

पापा मैं सब समझ गया
उसका निराला खेल
आदम हव्वा ,जन्नत पेड
सब की उसके हाथ में नकेल
वह है सब का मालिक
सब हैं उसके बन्दे
चाहए जैसे हों इंसान
सब हों अच्छे इंसान
या फिर सारे गंदे
शाहिद कबीरna

"The Artist" Short film by Shahid Kabeer